प्रश्न 1 कार्यशील नोट्स उत्तरों का हिस्सा होने चाहिए।
Sub-questions (5)
(क) एबीसी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कई वर्षों से सफलतापूर्वक व्यवसाय चला रही थी। पी कंपनी का खरीद प्रबंधक था। उसने अपने एजेंट क्यू को दिल्ली में सड़कों के निर्माण के लिए अपनी ओर से कच्चा माल खरीदने के लिए अधिकृत किया। उसने क्यू को दिल्ली में सड़कों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए केवल मज़बूत ब्रांड का सीमेंट ₹ 2,000 – 2,500 प्रति टन की दर से खरीदने का निर्देश दिया। हालांकि, क्यू ने एबीसी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के एक बहुत प्रसिद्ध विक्रेता श्री आर से मज़बूत ब्रांड का 1,000 टन सीमेंट ₹3,500/- प्रति टन की दर से खरीदा। श्री क्यू ने आर को यह तथ्य नहीं बताया कि वह एबीसी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के लिए सीमेंट खरीद रहा था। जब पी को इस बात का पता चला, तो उसने श्री आर को भुगतान करने से इनकार कर दिया और क्यू द्वारा खरीदे गए सीमेंट को इस आधार पर अस्वीकार कर दिया कि क्यू ने अपनी अधिकार सीमा का उल्लंघन किया था। इस लेनदेन के कारण श्री आर को भारी नुकसान हुआ। भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के प्रावधानों के अनुसार अपनी राय दें: (i) क्या पी अपने एजेंट श्री क्यू द्वारा खरीदे गए सीमेंट के लिए श्री आर को भुगतान करने के लिए बाध्य था? (ii) दूसरी ओर, एजेंट होने के नाते क्यू ने आर को मुआवजा देने की कोई भी जिम्मेदारी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इस स्थिति में, क्या श्री आर क्यू के खिलाफ मुकदमा दायर कर सकते हैं?
(ख) (i) कारणों सहित बताएं कि क्या निम्नलिखित कंपनियों को कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के संदर्भ में छोटी कंपनियों के रूप में माना जा सकता है: 1. एसटीएस प्राइवेट लिमिटेड, जिसका टर्नओवर ₹ 10 करोड़ और चुकता पूंजी ₹ 1 करोड़ (₹ 100 प्रत्येक के 1,00,000 इक्विटी शेयर) है। इनमें से 60,000 इक्विटी शेयर यूवी इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के पास हैं। 2. जेडएक्स लिमिटेड, जिसकी चुकता पूंजी ₹ 3 करोड़ और टर्नओवर ₹ 35 करोड़ है।
(ii) एसीडी लिमिटेड की चुकता इक्विटी शेयर पूंजी ₹ 80 करोड़ और वरीयता शेयर पूंजी ₹ 20 करोड़ है। बी लिमिटेड के पास एसीडी लिमिटेड में ₹ 15 करोड़ मूल्य की इक्विटी शेयर पूंजी और ₹ 10 करोड़ मूल्य के वरीयता शेयर हैं। क्या बी लिमिटेड को एसीडी लिमिटेड की सहयोगी कंपनी माना जा सकता है?
(ग) भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के प्रावधानों के अनुसार, निम्नलिखित की व्याख्या करें: (i) निवर्तमान भागीदार के प्रतिस्पर्धी व्यवसाय चलाने के अधिकार।
(ii) फर्म द्वारा क्षतिपूर्ति पाने के भागीदार के अधिकार और फर्म को क्षतिपूर्ति देने की भागीदार की देयता।