प्रश्न 5
Sub-questions (5)
(a) (i) P ने 13.12.2024 को Q को ₹3,00,000/- में कुछ प्राचीन वस्तुएँ बेचीं। समझौते की शर्तों के अनुसार, राशि का 75% एक सप्ताह के भीतर और शेष 25% 31.12.2024 तक भुगतान किया जाना था। Q ने अपनी पहली किस्त का भुगतान करने के बाद माल की डिलीवरी लेने के लिए अपने एजेंट R को नियुक्त किया। Q ने 18.12.2024 को NEFT के माध्यम से P के खाते में ₹ 2,80,000/- की राशि हस्तांतरित की, जो उसी तारीख को P के खाते में जमा हो गई। R चिकित्सा आपातकाल के कारण प्राचीन वस्तुओं की डिलीवरी लेने में विफल रहा। इस बीच, Q 31.12.2024 तक दूसरी किस्त का भुगतान करने में विफल रहा। 10.01.2025 को, Q का एजेंट माल की डिलीवरी लेने आया। लेकिन, P ने माल की डिलीवरी देने से इनकार कर दिया और माल पर अपने धारणाधिकार (right of lien) का प्रयोग किया। माल विक्रय अधिनियम, 1930 के प्रावधानों के अनुसार, अपनी राय दें कि क्या P धारणाधिकार का प्रयोग करने में उचित था, जबकि केवल ₹20,000/- का भुगतान शेष था?
(ii) दिल्ली में प्राचीन वस्तुओं के लिए एक नीलामी होती है। बोली लगाने वालों को सूचित किया जाता है कि बिक्री तभी पूरी होगी, जब नीलामकर्ता का हथौड़ा मेज पर गिरेगा और वह घोषणा करेगा कि "आप उच्चतम बोली लगाने वाले हैं"। नीलामी के दौरान, L ने ₹8 लाख की एक प्राचीन मूर्ति के लिए बोली लगाई। हथौड़ा गिरता है, लेकिन घोषणा नहीं की जा सकती क्योंकि नीलामकर्ता के कुछ भी कहने से पहले ही नीलामी अचानक रुक जाती है। सभी को सूचित किया जाता है कि उस विशेष मूर्ति के बाजार मूल्य में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, और इसलिए, इसे उस विशेष दिन नहीं बेचा जाएगा। L का तर्क है कि नीलामकर्ता उसे उस कीमत पर मूर्ति बेचने के लिए बाध्य है जिस पर उसने बोली लगाई थी क्योंकि एक बार जब उसने नीलामी में उच्चतम कीमत पर बोली लगाई और हथौड़ा गिर गया, तो नीलामी बिक्री पूरी हो गई थी और इसलिए, नीलामकर्ता मूर्ति बेचने के लिए एक संविदात्मक दायित्व के तहत है। नीलामकर्ता असहमत है। माल विक्रय अधिनियम, 1930 के प्रावधानों के संदर्भ में L के दावे की वैधता पर चर्चा करें।
(b) "साझेदार वास्तव में एक मालिक (principal) और एक एजेंट (agent) दोनों की भूमिका निभाता है। साझेदारी के स्वरूप और दायरे से बाहर नहीं, बल्कि व्यवसाय से संबंधित सभी मामलों में उसके द्वारा किए गए सभी कार्यों से फर्म को बाध्य करने का एक साझेदार का निहित अधिकार सामान्य तरीके से किया जाता है।" भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के प्रावधानों के संदर्भ में व्याख्या करें।
(c) (i) भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के प्रावधानों के संदर्भ में अपनी राय दें: 1. क्या संयुक्त वचनदाता (joint promisor) और वचनग्रहीता (promisee) मृत्यु के बाद भी स्वेच्छा से अपने दायित्व का निर्वहन कर सकते हैं? 2. यदि वे अपने दायित्व का निर्वहन करने में असमर्थ हों, तो क्या किसी भी संयुक्त वचनदाता को बाध्य किया जा सकता है? 3. यदि उनमें से कोई एक चूक करता है तो क्या स्थिति होगी?
(ii) उत्पीड़न (Coercion) के क्या प्रभाव हैं? "क्या आत्महत्या करने की धमकी उत्पीड़न है"? भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के प्रावधानों के संदर्भ में विस्तार से बताएं।